अद्वैत वेदांत के अनुसार, यह बाह्य संसार नाम और रूप (नाम-रूप) का एक प्रक्षेपण मात्र है, जो हमारी वास्तविक प्रकृति—सच्चिदानंद स्वरूप आत्मा—को ढके रहता है। हमारी ज्ञानेंद्रियां (इंद्रियां) लगातार बाहरी दुनिया की तरफ भागती हैं, जिससे जीवन में तृष्णा और बेचैनी बनी रहती है।
आधुनिक सॉफ्टवेयर हमारे ध्यान को बाहर की तरफ भटकाने की प्रक्रिया को और तीव्र कर देता है।
वेदांत अंतरापृष्ठ (The Vedanta Interface) का विचार इसके विपरीत है। यह एक ऐसा शांत डिजिटल क्षेत्र है जो हमारी इंद्रियों को बहिर्मुखी बनाने के बजाय अंतर्मुखी होने में सहायता करता है। यह उपयोगकर्ता से खुद को देखने की मांग नहीं करता, बल्कि अपना कार्य सहजता से पूरा करने के बाद विलीन हो जाता है, ताकि उपयोगकर्ता अपनी ही शांत और शुद्ध उपस्थिति में विश्राम कर सके।